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मेरा देश||My country

This poem is written by me dedicated to my great country India.


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मेरा देश बदल रहा है
मेरा देश सोना उगल रहा है,
मेरा देश हरपल प्रगति कर रहा है,
मेरा देश अद्भुत परिवेश बन रहा है
लूटा था जिन्होंने एक सदी पहले
उनसे आगे निकल रहा है मेरा देश
खींच रहा है खुद
अपनी किस्मत की लकीरें मेरा देश
बनकर उभर रहा है
महाशक्ति मेरा देश
हर खेल,हर स्पर्धा में
लोहा मनवा रहा है मेरा देश
कर रहा है अपने आपको
सिध्द सर्वोतम मेरा देश
© मुदस्सर कुरैशी
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Chandrayaan 2 |चंद्रयान-2| A poem for Chandrayaan-2 in hindi

निकलने को था तैयार बाहुबली पर सवार होकर
दुनिया में लोहा मनवाने,
हो गई थी उल्टी गिनती शुरू
सबको शौर्य दिखलाने
978 करोड़ी यह मिशन
था ले जाने को तैयार यह 3.8 टन वजन
यूँ बँटा था कुछ तीन हिस्सो में
प्रथम भाग था ऑर्बिटर
जो करता चंद्रमा का एक साल तक परिक्रमण
द्वितीय भाग था विक्रम लैंडर
जिसको उतरना था चंद्रमा पर
लेकर तृतीय भाग प्रज्ञान रोवर

Chandrayaan-2|चंद्रयान-2|A poem for Chanadrayaan-2 in hindi|Baahubali|#mudassarqureshi #ISRO


प्रज्ञान मतलव बुद्धि
इसी को करनी थी
14 दिनों में चंद्रमा केे दक्षिणी क्षेत्र पर पानी,खनिज आदि को खोज कर
प्राचीन आँकड़ों की शुद्धि
यूँ कुछ 56 मिनट 24 सेकंड पहले
आई बाहुबली में कुछ तकनीकी खामी
भरी इसरो ने यह हामी
सुनकर यह दुखद संदेश
देश को हुआ बहुत खेद
सबको लगा
हम नहीं बन पायेंगे
चंद्रमा के दक्षिणी क्षेत्र में
उतरने वाले प्रथम देश
उनको बताने
की हम है सफलता के दिवाने,
उनको समझाने
की हम है पलटवार करने वाले
उनको दिखाने
की हम है अटल इरादों वाले
आज नहीं तो कल
जरूर पहुँचेंगे चंद्रमा के दक्षिणी तल
इसरो से आया एक नया संदेश
22 जुलाई दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर
सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से
निकलेगा रॉकेट लेकर 'चंद्रयान 2' को
करने सवा सौ करोड़ की उम्मीदों को पूरा
फहरायेगा चंद्रमा पर तिरंगा तेरा


  ©Mudassar Qureshi

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क्या जिंदगी इसी का नाम है? | what is life in Hindi

क्या कभी आपने सोचा है कि जिंदगी क्या है ? क्या जिस तरह से हम जी रहे हैं यही जिंदगी है ? क्या सच में जो जिंदगी को हम समझते हैं वही जिंदगी है ? क्या कभी आपने खुद से यह सवाल किए हैं? मुझे लगता है आप लोगों में से कुछ चंद लोगों ने यह सवाल अपने आपसे किये होंगे | तो चलिए आज इस पर एक बार विचार करते हैं|


आपके नजरिए में सुबह जल्दी उठना भागते दौड़ते तैयार होना और नाश्ता करके ऑफिस पहुंचना और दिन भर ऑफिस में काम करके रात को थके हारे घर लौट कर खाना खाकर चादर तान कर सो जाना है, कुछ इसी तरह बहुत से लोग तो सालों से काम किये जा रहे हैं| उन्होंने कभी भी नहीं सोचा होगा कि क्या जो वह कर रहे हैं सचमुच यही उनकी जिंदगी का मकसद है? क्या इसे ही जिंदगी जीना कहते हैं?
      ज्यादातर लोग बेवजह या पैसे के पीछे भागे चले जा रहे हैं उन्हें खुद नहीं पता कि आखिर कर क्या रहे हैं? फिर भी दौड़ में लगे हुए हैं, पता नहीं लोग कुछ सोचते समझते भी हैं या नहीं|   दोस्तों! जरा रुको और सोचो | जिंदगी खुदा का दिया हुआ नयाब तोहफा है| इसे बेवजह बर्बाद ना करो | सोचो क्या सच में जो आप कर रहे हो, उसके लिए आप बने हो| अपने जीवन के मकसद को पहचानो |अपनी पहचान को खोज और उस मार्ग प्रशस्त हो जो आपके लिए उचित है या बना है|   हमारी सफलता हमारे जिंदगी जीने के तरीके पर निर्भर करती है | मान लो आपका रुझान कंप्यूटर में ज्यादा है आप घंटों कंप्यूटर पर काम करके भी नहीं थकते| लेकिन अपने करियर को कंप्यूटर के क्षेत्र में ना बनाते हुए कपड़ा उद्योग में अपने करियर को तलाशें | ऐसे में आपके सफल होने की संभावना कम है, ऐसे ही बहुत सारे लोग अपनी रुचि से अलग दूसरे क्षेत्रों में सफलता को तलाश रहे ह या कहूं  परिस्थितियों से जूझ रहे हैं| जब वह आपका पसंदीदा क्षेत्र है ही नहीं तो आप उसमें सफल कैसे हो सकते हैं| ऐसे लोगों को हमेशा अपने आप से शिकायत होती है कि वह सफलता की बुलंदियों को क्यों नहीं छुपा रहे हैं|

         तेरी सफलता की कुंजी है तेरी रुचि 

       इसलिए अपनी जिंदगी को अपने उसूलों पर जियो वरना जिंदगी भर अपने आप से शिकायत करते रहोगे| हमारे जीने का तरीका हमारे कल का निर्णय करता है |आज चाहे जो परिस्थितियां हो लेकिन कभी अपने रास्ते से मत भटको | यदि आज तुम्हारे पैर लड़खड़ा गए तो कभी भी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाओगे |एक बात हमेशा याद रखना रास्ते बदलना लेकिन मंजिल  नहीं |
         हमसे बहुत सारे लोगों की उम्मीदें, प्यार, रिश्ते और भी बहुत कुछ जुड़ा हुआ है हमें उन सब का ध्यान रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए | सिर्फ किसी एक चीज के पीछे भागने से हम उसे पा तो सकते हैं, लेकिन जब पीछे मुड़कर देखेंगे तो पाएंगे कि हमने इसके लिए बहुत बड़ी कीमत चुकाई है|
         मेरे नजरिए में, ''जिंदगी खुदा का एक अनमोल तोहफा है| जिसे खुदा ने हमें एक विशेष कार्य को करने के लिए दिया है|''
      हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि उस विशेष कार्य को पहचाने और उसे अंजाम दें |अगर आप उस विशेष कार्यों को ना कर पाए तो उस खुदा को क्या मुंह दिखाओगे? आज ही सोचो कि आप इस दुनिया में क्यों हों?   बहुत से लोगों को खुदा ने दूसरों की मदद के लिए, बहुत से लोगों को कुछ अविश्वसनीय या अद्भुत कार्य के लिए तथा बहुत से लोगों को सुख शांति फैलाने जैसे अनेक कार्यों के लिए जिंदगी दी है|                      

  आपकी शुभकामनाओं के साथ आज यहीं तक आगे फिर कभी आपके सामने कुछ नया अवश्य पेश करूंगा|  आप लोगों से अनुरोध है कि अपने महत्वपूर्ण सुझाव कमेंट बॉक्स में जरूर दें|     

                  धन्यवाद  


  ©Mudassar Qureshi

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अहसास(Realization) | Love poetry

किसी के पास होने का अहसास होता है,
किसी का दिल में बसने का गुमान होता है;
किसी का धड़कनों मे चलने का अहसास होता है,
किसी का हर समय यादों में आना होता है,
किसी के लिए यह दिल हरपल बेचैन होता है,
Image source - Internet

किसी के हरपल जकड़े रहना का अहसास होता है,
किसी को पाने के लिए यह बावला मन हरपल हैरान परेशान रहता है;
किसी की खुशबू का कंधे पर अहसास होता है,
किसी को कागजों पर उतार देने को यह दिल मचलता है,
किसी को समय मे कैद करने का संकोच रहता है,
किसी के साथ आसमान मे गुमनाम होने को दिल बेताव रहता है,
किसी के साथ समुद्र की गहराई मापने का इंतजार रहता है,
किसी के साथ दुनिया के आखरी छोर पर एक अपरिचित इलाके में दुनिया बसाने का बस अब इंतजार रहता है,
बस अब उसके इकरार को दिल बेकरार रहता है,
कौन है वो.......
कौन है वो.........
छोड़ने को तैयार हूँ जिसके लिए दुनिया
वो आशिकी है मेरी
दिललगी है वो मेरी
जिंदगी है वो मेरी
और क्या हूँ बस जीवनसाथी है वो मेरी..
©Mudassar Qureshi

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धन-धन-धन |Money-Money| A poetry for today's world

धन धन धन
यह ही है सबके मन
इससे ऊपर उठता नहीं किसी का भी कलुषित मन
कहीं इर्ष्या,कहीं द्वेष
कहीं भ्रष्टाचार,तो कहीं शत्रुता
इसकी के है यह रूप अनेक
इस धनरूपी शैतान का
पालना है यह तुच्छ संसार
इसके पोषण करता हैं हम सांसारिक  लोग
जिनको है संसार की वस्तु से अत्यंत  लोभ
जिनके लिए तैयार रहते हम हरदम
बढाने को छल कपट से भरा अत्यंत तुच्छ कदम

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धन धन धन
यह बिगाड़ देता है अच्छे-अच्छों का कल
हाँ! बिगाड़ देता है यह अच्छे-अच्छों का कल
जो, फँस जाता है इसके जाल में
वो बच नहीं पाता किसी भी काल में
है यह वो सर्प,
है यह वो सर्प,जो पनपता है
जरूरतों के नाम से
जरूरतों से छल-कपट
छल-कपट से इर्ष्या-द्वेष
इर्ष्या-द्वेष से शत्रुता
शत्रुता से अपराध
यह ही है इस धन रूपी सर्प का कमाल


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प्रेम रूपी विष से , इस धन रूपी शैतान को
आज आओ मिलकर खत्म कर दें
अन्यथा,वह दिन दूर नही
जब यह संसार बन जायेगा
इर्ष्या-द्वेष,भ्रष्टाचार-शत्रुता का प्रदेश|
©Mudassar Qureshi

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