धन धन धन
यह ही है सबके मन
इससे ऊपर उठता नहीं किसी का भी कलुषित मन
यह ही है सबके मन
इससे ऊपर उठता नहीं किसी का भी कलुषित मन
कहीं इर्ष्या,कहीं द्वेष
कहीं भ्रष्टाचार,तो कहीं शत्रुता
इसकी के है यह रूप अनेक
इस धनरूपी शैतान का
पालना है यह तुच्छ संसार
इसके पोषण करता हैं हम सांसारिक लोग
जिनको है संसार की वस्तु से अत्यंत लोभ
जिनके लिए तैयार रहते हम हरदम
बढाने को छल कपट से भरा अत्यंत तुच्छ कदम
कहीं भ्रष्टाचार,तो कहीं शत्रुता
इसकी के है यह रूप अनेक
इस धनरूपी शैतान का
पालना है यह तुच्छ संसार
इसके पोषण करता हैं हम सांसारिक लोग
जिनको है संसार की वस्तु से अत्यंत लोभ
जिनके लिए तैयार रहते हम हरदम
बढाने को छल कपट से भरा अत्यंत तुच्छ कदम
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| Image source-Internet |
धन धन धन
यह बिगाड़ देता है अच्छे-अच्छों का कल
हाँ! बिगाड़ देता है यह अच्छे-अच्छों का कल
जो, फँस जाता है इसके जाल में
वो बच नहीं पाता किसी भी काल में
है यह वो सर्प,
है यह वो सर्प,जो पनपता है
जरूरतों के नाम से
जरूरतों से छल-कपट
छल-कपट से इर्ष्या-द्वेष
इर्ष्या-द्वेष से शत्रुता
शत्रुता से अपराध
यह ही है इस धन रूपी सर्प का कमाल
यह बिगाड़ देता है अच्छे-अच्छों का कल
हाँ! बिगाड़ देता है यह अच्छे-अच्छों का कल
जो, फँस जाता है इसके जाल में
वो बच नहीं पाता किसी भी काल में
है यह वो सर्प,
है यह वो सर्प,जो पनपता है
जरूरतों के नाम से
जरूरतों से छल-कपट
छल-कपट से इर्ष्या-द्वेष
इर्ष्या-द्वेष से शत्रुता
शत्रुता से अपराध
यह ही है इस धन रूपी सर्प का कमाल
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प्रेम रूपी विष से , इस धन रूपी शैतान को
आज आओ मिलकर खत्म कर दें
अन्यथा,वह दिन दूर नही
जब यह संसार बन जायेगा
इर्ष्या-द्वेष,भ्रष्टाचार-शत्रुता का प्रदेश|
आज आओ मिलकर खत्म कर दें
अन्यथा,वह दिन दूर नही
जब यह संसार बन जायेगा
इर्ष्या-द्वेष,भ्रष्टाचार-शत्रुता का प्रदेश|
©Mudassar Qureshi


1 comments:
Superb bro!
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